यूपी में सामान्य से 18% कम बारिश, पूर्वी यूपी में 27% तो पश्चिमी यूपी में 2% की कमी दर्ज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बीते कई दिनों से जारी मूसलाधार और आफत की बारिश पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ने के कारण 23 जुलाई को प्रदेश के किसी भी जिले में भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से हो रही झमाझम और मूसलाधार बारिश के बाद अब मौसम के मिजाज में नरमी के संकेत मिले हैं। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़ने और मानसूनी ट्रफ रेखा के दक्षिण की तरफ खिसकने की वजह से राज्य में बारिश की तीव्रता काफी घट गई है।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 23 जुलाई को पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक स्थानों पर केवल गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें या सामान्य बारिश हो सकती है, लेकिन किसी भी हिस्से के लिए भारी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
अगले 4-5 दिनों में बढ़ेगी उमस, 26 जुलाई से फिर बारिश का दौर
बारिश का सिलसिला थमने और धूप खिलने के कारण आने वाले 4 से 5 दिनों में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हवा में नमी का स्तर ज्यादा होने से लोगों को तीखी उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि 26 जुलाई से प्रदेश में मानसूनी हवाएं एक बार फिर सक्रिय होंगी और कई जिलों में तेज बारिश का नया दौर शुरू होगा।
मिर्जापुर में सबसे ज्यादा 190 मिमी बारिश, जानिए अब तक का आंकड़ा
राहत मिलने से पहले पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई। मिर्जापुर के चुनार में सबसे अधिक 190 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके अलावा सिद्धार्थनगर, शाहजहांपुर, संभल, गोरखपुर, चित्रकूट, बलरामपुर, उन्नाव, कानपुर नगर, बाराबंकी और सोनभद्र में अच्छी वर्षा हुई। मौसम विभाग के 21 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में अब तक पूरे यूपी में सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश हुई है।
आम जनता और किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन
मौसम विभाग ने बारिश के दौरान सतर्कता बरतने की सलाह दी है। गरज-चमक और बिजली कड़कने के समय लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे जाने से बचने को कहा गया है। वहीं, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पानी न रुकने दें और धान, मक्का, गन्ना व सब्जी की फसलों में जल निकासी का उचित प्रबंध रखें।
